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प्रेम : एक रचनात्मक शक्ति

“जहा भी जाओ प्रेम बांटते चलो शुरुवात अपने घर से करो अपने बच्चो, पति पत्नी, पडोसी, को प्रेम दो.. जो भी तुमसे मिलने आये पहले से ज्यादा खुश होकर ही लौटे. ईश्वर की दयालुता के जीते जागते उदाहरण बहो : दयालुता अपने समूचे व्यक्तित्व में – अपने चेहरे, आँखों, मुस्कराहट और शब्दों में झलकनी चाहिए.” …