प्रेम : एक रचनात्मक शक्ति

“जहा भी जाओ प्रेम बांटते चलो शुरुवात अपने घर से करो अपने बच्चो, पति पत्नी, पडोसी, को प्रेम दो.. जो भी तुमसे मिलने आये पहले से ज्यादा खुश होकर ही लौटे. ईश्वर की दयालुता के जीते जागते उदाहरण बहो : दयालुता अपने समूचे व्यक्तित्व में – अपने चेहरे, आँखों, मुस्कराहट और शब्दों में झलकनी चाहिए.” – Mother Teresa कॉलेज के समाजशास्त्र विषय के एक प्रोफेसर ने अपने विद्यार्थी को एक प्रोजेक्ट दिया उन्होंने विद्यार्थी से कहा की वे बाल्टीमोर की झोपड़पट्टी

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