क्या है आज़ादी का रहस्य

शेख सदी ने गुलिस्तां में लिखा है ” की लोगो ने एक बार बुध्दिमान व्यक्ति से पूछा की परमात्मा के बनाये हुए बहुत बड़े से बड़े और छायादार विक्षो में ‘ सरो  ‘ के आलावा किसी को आज़ाद क्यों नहीं मन जाता जिसमे कोई फल तक नहीं लगता, इसका रहस्य क्या है ? 
उसने उत्तर दिया की  ‘ हरेक वृक्ष की अपनी अलग अलग फसल होती है , अपनी अपनी श्रीतु होती है जिसमे वह हरा भरा रहता है फूलता है और उसके बाद वह सुख जाता है या कुम्हला जाता है , लेकिन सरो का पेड़ सदा हरा भरा रहता है वह श्रीतुओ की दशाओ में नहीं बंधता, स्वतन्त्र लोगो की भी यही प्रकृति होती है जो  श्रेणिक है उसमे अपना मन मत लगाओ , खलीफाओं की परम्परा का अंत हो जाने पर भी दजला नदी बाग्दाद् से होकर बहती ही रहेगी अगर तेरे हाथो के लिए प्रचुर धन धन्य हो तो खजूर के पेड़ की तरह दानशील बन. .  लेकिन अगर तेरे पास देने के लिए कुछ भी नहीं है तो सरो के पेड़ की तरह आज़ाद बन.